Monday, December 7, 2009

आज ऐसा दिन आया,
एक दोस्त ज़िन्दगी के
सफर में आगे निकल परा.
एक ऐसा दिन आएगा,
एक और दोस्त ज़िन्दगी के
दुसरे पडाव में आगे निकल जाएगी।
तकलीफ नही है, कोई परेशानी नही है,
है तोह बस एक अकेलापन, एक अजीब सन्नाटा...
ज़िन्दगी की एक और दौर, निकल चलेंगे आगे
हम भी......इसी दौर में...
मिलेंगे हम सब, हंसंगे फ़िर हम सब,
येही है आशा, येही ज़िन्दगी.

3 comments:

  1. दिन तो आते है,
    रातें जाती है,
    हाथों की लकीर,
    यह तकदीर,
    मिटाए ना मिटे ।
    दोस्ती तो वोह चीज़ है,
    दूरिओं में वोह ताकत कहाँ जो वज़न घटा सके,
    बस एक फ़ोन कॉल की ही तो दूरी है।
    अरे, याद तो करके देखो दिल से,
    न पाओ पास तो समझ लेना,
    मरके भी मर चुका है बंदा,
    लेना धीरज से सांस तो जो महक मिलेगी,
    हवाओं में, वह हमारी ही होगी

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  2. nice one..!!
    i think patna is showing it's effects on asi..!! ;)

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